रामेश्वर मंदिर, पिथौरागढ़
सरयू और रामगंगा का संगम सदियों से सोर घाटी और आसपास के गांवों के लिए पवित्र स्थल माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, देव डंगरी को शरीर में देवता के अवतरण से पहले इस
सरयू और रामगंगा का संगम सदियों से सोर घाटी और आसपास के गांवों के लिए पवित्र स्थल माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, देव डंगरी को शरीर में देवता के अवतरण से पहले इस
गोरखों की कुलदेवी मानी जाने वाली मां उल्का देवी का यह मंदिर पिथौरागढ़ में चंडाक जाने वाली सड़क पर स्थित है, जो मुख्यालय से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर है। इतिहास और स्थापना गोरखों
चंडिका मंदिर धूरा माता चंडिका को समर्पित एक पवित्र स्थल है, जो पिथौरागढ़ से 9 किलोमीटर, मोस्तामानू से 3 किलोमीटर, और मढ़ गांव से 2 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों के बीच स्थित है।
पिथौरागढ़ के झूलाघाट मार्ग पर स्थित सैनिक छावनी के ठीक ऊपर कुसौली गांव की पहाड़ी पर भव्य कामाख्या देवी मंदिर स्थापित है। यह मंदिर हिंदू "इच्छा की देवी" को समर्पित है। पिथौरागढ़ मुख्यालय से इसकी
हिलजात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मनाया जाने वाला एक अनूठा लोक महोत्सव है, जिसे मुख्य रूप से क्षेत्रीय खेती-बाड़ी और पौराणिक संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है। यह पर्व खूंट, अस्कोट, और सोर घाटी
आज पहली मंज़िल संस्थान द्वारा 'पिथौरागढ़ अनुभवोत्सव' का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य पिथौरागढ़ जिले के गठन दिवस (1960) का उत्सव मनाना था। कार्यक्रम की मुख्य झलकियां: 🎶 हुड़का वादन प्रस्तुति – प्रसिद्ध कलाकार महेश
आगामी आदि कैलाश एवं ओम पर्वत यात्रा को सुविधाजनक एवं सुरक्षित बनाने के लिए जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में पर्यटकों हेतु ईनर लाइन परमिट जारी
शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने बताया कि उत्तराखंड में कार्यरत सभी अधिकारियों/कर्मचारियों जिनका विवाह 26 मार्च 2010 के बाद हुआ है, उनके लिए समान नागरिक संहिता उत्तराखंड-2024 की नियमावली