पिथौरागढ़। आदलि कुशलि कुमाउंनी मासिक पत्रिका के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पांचवें कुमाउंनी भाषा सम्मेलन का शुभारम्भ जिला पंचायत सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। सम्मेलन में भाषा संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को लेकर विद्वानों, साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों ने अपने विचार साझा किए तथा कुमाउंनी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर धीरेश जोशी, विशिष्ट अतिथि नेपाली साहित्यकार देवेंद्र भट्ट एवं डॉ. परमानंद चौबे रहे। हर्षिता पुनेठा, अनीता जोशी और मुन्नी टम्टा की टीम ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
आयोजक एवं आदलि कुशलि की संपादक डॉ. सरस्वती कोहली ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मुख्य विषय के साथ छह उपविषयों पर साहित्यकार एवं भाषाविद अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर रहे हैं।
कुमाउंनी को बचाने के लिए घर से करनी होगी शुरुआत
प्रथम सत्र में “कुमाउंनी कैं अघिल बढून खिन सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति कि जरवत” विषय पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कुमार पंत ने कहा कि कुमाउंनी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को एकजुट होकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि जब परिवारों में आपसी संवाद कुमाउंनी में होगा, तभी नई पीढ़ी भी अपनी मातृभाषा को अपनाने के लिए प्रेरित होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड भाषा संस्थान के सदस्य डॉ. हयात सिंह रावत ने की। उन्होंने कुमाउंनी भाषा को रोजगार से जोड़ने और विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं ब्रिगेडियर धीरेश जोशी ने कहा कि मातृभाषा को जीवित रखने की शुरुआत अपने घर और परिवार से ही करनी होगी।
नई पुस्तकों का विमोचन और सम्मान समारोह
सम्मेलन के दौरान कुमाउंनी भाषा सम्मेलन 2025 विशेषांक का विमोचन किया गया। साथ ही सोर पब्लिकेशन हाउस, पिथौरागढ़ से प्रकाशित चार नई पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ, जिनमें—
- ‘पितर कुड़ी’ – रमेश हितैषी
- ‘भाना गंगनाथ : एक प्रेम काथ’ – डॉ. सरस्वती कोहली
- ‘भविष्य का सौदा’ – भूपेंद्र देव ताऊजी
- ‘पिथौरागढ़ दर्शन’ – डॉ. पीताम्बर अवस्थी
शामिल हैं।
इस अवसर पर भूपेंद्र सिंह बृजवाल को कुमाउंनी भाषा सेवी सम्मान, डॉ. पवनेश ठकुराठी को कुमाउंनी साहित्य सेवी सम्मान, जगमोहन सिंह रावत ‘जगमौरा’ को लोक भाषा सेवी सम्मान तथा गजेंद्र बटोही को साहित्य सेवी सम्मान प्रदान किया गया।
सोशल मीडिया और शिक्षा के माध्यम से भाषा संरक्षण पर जोर
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता पहरू पत्रिका के संपादक नीरज पंत ने की। मुख्य वक्ता दिनेश भट्ट, कृपाल सिंह शीला, डॉ. किशोर पंत और नवीन पंत ने पूर्वी-पश्चिमी बोलियों में शब्दगत विभेद, परस्पर सम्मान और स्वीकार्यता जैसे विषयों पर विचार रखे।
वक्ताओं ने सुझाव दिया कि—
- आगामी जनगणना में सभी लोग अपनी मातृभाषा के रूप में कुमाउंनी दर्ज कराएं।
- सोशल मीडिया, डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से कुमाउंनी भाषा का व्यापक प्रचार किया जाए।
- प्रत्येक विद्यालय में मातृभाषा दिवस मनाया जाए।
- सरकारी कामकाज और संवाद में कुमाउंनी भाषा का प्रयोग बढ़ाया जाए।
- कुमाउंनी को डिजिटल प्लेटफॉर्म और गूगल की भाषाओं में शामिल कराने के लिए प्रयास किए जाएं।
कृपाल सिंह शीला ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से विद्यार्थियों की समझ बेहतर होती है और सरकार को इसे विद्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू करना चाहिए।
विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों की रही सहभागिता
सम्मेलन में कुमाउंनी, गढ़वाली, रवांल्टी और नेपाली भाषा के साहित्यकारों एवं भाषा प्रेमियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम स्थल पर पुस्तक एवं ऐपण प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।
कार्यक्रम में होशियार सिंह ज्याला, काशी सिंह ऐरी, मुकेश पंत, चंद्रशेखर पुनेड़ा, त्रिभुवन गिरी महाराज, दीपक भाकुनी, प्रो. शीतल सिंह भंडारी, डॉ. आनंदी जोशी, डॉ. नीरज चंद्र जोशी, तनुज भट्ट, कंचनलता पंत, गजेन्द्र बोहरा, हिमांशु जोशी, जीवन चंद्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और भाषा प्रेमी उपस्थित रहे।
मंच संचालन चिंतामणि जोशी एवं विप्लव भट्ट ने किया।
