Gurna Mata Temple – A Sacred Temple in Pithoragarh
गुरना माता मंदिर (Gurna Mata Temple), जिसे पाषाण देवी मंदिर भी कहा जाता है, टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर, पिथौरागढ़ शहर से 13 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर गुरना गांव के पास होने के कारण
गुरना माता मंदिर (Gurna Mata Temple), जिसे पाषाण देवी मंदिर भी कहा जाता है, टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर, पिथौरागढ़ शहर से 13 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर गुरना गांव के पास होने के कारण
कालापानी: आस्था और प्रकृति का संगम कालापानी, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक खूबसूरत तीर्थस्थल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह स्थान पिथौरागढ़ से 110 किमी दूर और 11788 फीट की ऊँचाई
Thal Kedar Mahadeva, located 16 km from Pithoragarh, is one of the most serene and spiritually uplifting destinations dedicated to Lord Shiva. The temple is perched on a hilltop, accessible via a two-hour trek, offering
सरयू और रामगंगा का संगम सदियों से सोर घाटी और आसपास के गांवों के लिए पवित्र स्थल माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, देव डंगरी को शरीर में देवता के अवतरण से पहले इस
गोरखों की कुलदेवी मानी जाने वाली मां उल्का देवी का यह मंदिर पिथौरागढ़ में चंडाक जाने वाली सड़क पर स्थित है, जो मुख्यालय से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर है। इतिहास और स्थापना गोरखों
चंडिका मंदिर धूरा माता चंडिका को समर्पित एक पवित्र स्थल है, जो पिथौरागढ़ से 9 किलोमीटर, मोस्तामानू से 3 किलोमीटर, और मढ़ गांव से 2 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों के बीच स्थित है।
पिथौरागढ़ के झूलाघाट मार्ग पर स्थित सैनिक छावनी के ठीक ऊपर कुसौली गांव की पहाड़ी पर भव्य कामाख्या देवी मंदिर स्थापित है। यह मंदिर हिंदू "इच्छा की देवी" को समर्पित है। पिथौरागढ़ मुख्यालय से इसकी