गंगोलीहाट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक छोटा हिमालयी पर्वतीय नगर है। यह नगर ऊँचे पहाड़ों, सुरम्य प्राकृतिक दृश्यों और देवदार के घने जंगलों से घिरा हुआ है। गंगोलीहाट देवी काली के “कटैया शक्तिपीठ” के लिए प्रसिद्ध है। यह पहाड़ी नगर पिथौरागढ़ जिले से 78 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इस क्षेत्र के चारों ओर दो नदियाँ बहती हैं – “सरयू” और “रामगंगा”। ये दोनों नदियाँ इस क्षेत्र की पहचान हैं। स्थानीय भाषा में “गंग” का अर्थ नदी और “आवली” का अर्थ माला होता है, जिससे यह क्षेत्र पहले “गंगावली” के नाम से जाना जाता था, जो बाद में “गंगोली” बन गया। वहीं, “हाट” शब्द स्थानीय बाज़ार या मुख्य व्यापारिक केंद्र के लिए प्रयुक्त होता है। इस प्रकार, “गंगोली + हाट” से इस स्थान का नाम “गंगोलीहाट” पड़ा।
गंगोलीहाट क्षेत्र में कई प्रसिद्ध गुफाएँ हैं, जिनमें पाताल भुवनेश्वर, शैलेश्वर गुफा और मुक्तेश्वर गुफा मुख्य रूप से प्रसिद्ध हैं। यहाँ स्थित महाकाली शक्तिपीठ की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने “कालिका मंदिर” में की थी। ऐसा माना जाता है कि पश्चिम बंगाल में स्थित देवी कालिका माता, बेंगलुरु से स्थानांतरित होकर गंगोलीहाट में विराजमान हुई थीं। गंगोलीहाट में स्थित हाट कालिका मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध है और भारतीय सेना के जवान भी इस मंदिर में विशेष श्रद्धा रखते हैं।

