चैतोल पर्व: सोर घाटी की जीवंत आस्था और लोक परंपरा

चैतोल पर्व देवलसमेत बाबा डोली यात्रा पिथौरागढ़

चैतोल पर्व के दौरान बाबा की डोली यात्रा

उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले की सोर घाटी में मनाया जाने वाला चैतोल पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति, सामाजिक एकता और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का अद्भुत प्रतीक है। इस पर्व में क्षेत्र के आराध्य देवलसमेत बाबा 22 गाँवों की माँ भगवती स्वरूप बहनों को भिटौला देने के लिए एक विशेष यात्रा पर निकलते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। चैतोल की शुरुआत विण गाँव स्थित तपस्यूड़ा मंदिर से होती है, जहाँ विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद बाबा की डोली यात्रा प्रारंभ होती है। ढोल-दमाऊ की गूंज, लोकगीतों की मधुर धुन और “जय बाबा” के जयकारों के बीच यह यात्रा कुमौड़, जाखनी, चैंसर, दौला, देवलालगांव, धनौड़ा, घुनसेरा, ओडमाथा, नैनी सहित कुल 22 गाँवों तक पहुँचती है। हर गाँव में श्रद्धालु बाबा का भव्य स्वागत करते हैं और पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्सव का वातावरण बन जाता है।

इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक पहलू भिटौला परंपरा है, जिसमें भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त करता है। चैतोल में यह परंपरा एक दिव्य रूप ले लेती है, क्योंकि यहाँ स्वयं देवलसमेत बाबा इस परंपरा का निर्वहन करते हैं, जिससे यह उत्सव और भी पवित्र और विशेष बन जाता है। यह परंपरा समाज में रिश्तों की मजबूती और आपसी जुड़ाव को दर्शाती है। चैतोल यात्रा का समापन घंटाकरण में होता है, जहाँ लुन्ठ्यूड़ा से लाए गए माँ भगवती के डोले के साथ मिलन होता है। यह मिलन अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक क्षण होता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।

चैतोल पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम भी है। यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और जड़ों से जोड़ता है, साथ ही समाज में एकता, भाईचारा और सामूहिक भावना को मजबूत करता है। ढोल-दमाऊ की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और भक्तिमय वातावरण इस पर्व को और भी आकर्षक बनाते हैं। वास्तव में, चैतोल केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और मानवीय रिश्तों का जीवंत संगम है, जो हर वर्ष लोगों के दिलों में नई ऊर्जा और श्रद्धा का संचार करता है। 🙏

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