आदलि कुशलि
उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। इसी विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है “आदलि कुशलि”, जो पिथौरागढ़ (सोर घाटी) से प्रकाशित एक कुमाऊँनी मासिक पत्रिका है।
इस पत्रिका की शुरुआत जून 2017 में हुई, और तब से यह निरंतर कुमाऊँनी भाषा, लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक साहित्य को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
यह पत्रिका केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, अपनी भाषा और अपनी पहचान को जीवित रखने का एक सांस्कृतिक अभियान है।
🎯 पत्रिका का उद्देश्य
“आदलि कुशलि” का उद्देश्य केवल लेख और समाचार प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज को उसकी संस्कृति से जोड़ना है:
- कुमाऊँनी बोली-भाषा का संरक्षण और प्रचार-प्रसार
- लोक संस्कृति और लोक साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाना
- प्रवासी उत्तराखण्डियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखना
- नए लेखकों और रचनाकारों को मंच प्रदान करना
- पुराने साहित्यकारों की अमूल्य रचनाओं का पुनः प्रकाशन
🌸 प्रमुख विषय-वस्तु
इस मासिक पत्रिका में विभिन्न प्रकार की सामग्री प्रकाशित की जाती है:
- 🏞️ लोक संस्कृति और परंपराएं
- 🎭 लोक कला, लोक संगीत और लोक नृत्य
- 🧓 स्थानीय व्यक्तित्व और प्रेरणादायक कहानियां
- 📰 सामाजिक एवं क्षेत्रीय समाचार
- ✍️ कविताएं, लेख, कहानियां (कुमाऊँनी एवं हिंदी)
🎤 सांस्कृतिक गतिविधियाँ
“आदलि कुशलि” केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि एक सक्रिय सांस्कृतिक मंच भी है, जो समय-समय पर विभिन्न आयोजन करता है:
- 🎙️ प्रत्येक वर्ष जून माह में द्वि-दिवसीय कुमाऊँनी भाषा सम्मेलन
- 📝 प्रत्येक माह साहित्यिक गोष्ठी एवं कविता गोष्ठी
- 🎉 त्यौहारों और विशेष अवसरों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
ये गतिविधियाँ समाज में भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
🧑🤝🧑 समाज और नई पीढ़ी पर प्रभाव
“आदलि कुशलि” विशेष रूप से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रही है:
- बच्चों और युवाओं में अपनी भाषा के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना
- कुमाऊँनी बोली को दैनिक जीवन में प्रयोग करने के लिए प्रेरित करना
- सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाना
🌍 प्रवासी उत्तराखण्डियों से जुड़ाव
आज “आदलि कुशलि” केवल पिथौरागढ़ या उत्तराखंड तक सीमित नहीं है।
देश के विभिन्न शहरों में बसे प्रवासी उत्तराखण्डी भी इस पत्रिका के माध्यम से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े हुए हैं।
यह पत्रिका प्रवासी समाज के लिए अपनी मिट्टी से जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
📈 निरंतर प्रयास और सहयोग
सीमित संसाधनों के बावजूद, जून 2017 से अब तक “आदलि कुशलि” निरंतर प्रकाशित हो रही है।
इस यात्रा में पाठकों, लेखकों, समाजसेवियों और सभी सहयोगियों का अमूल्य योगदान और स्नेह लगातार मिलता रहा है, जिसने इस प्रयास को मजबूत बनाया है।
💳 सदस्यता (Subscription)
अब आप घर बैठे ही “आदलि कुशलि” पत्रिका के सदस्य बन सकते हैं और अपनी भाषा व संस्कृति से जुड़े रह सकते हैं।
📋 सदस्यता योजनाएं
- 🏆 संरक्षक सदस्यता: ₹5000
- 🌟 आजीवन सदस्यता: ₹3000
- 📅 तीन वर्षीय सदस्यता: ₹1000
- 📖 वार्षिक सदस्यता: ₹300
👉 अपनी सुविधा और रुचि के अनुसार कोई भी योजना चुन सकते हैं।
📲 भुगतान के तरीके
सदस्यता लेना अब बहुत आसान है:
- Google Pay
- PhonePe
- Paytm
📞 मोबाइल नंबर:+91 97565 53728
📧 Email: aadalikushali@gmail.com
📜 भविष्य का उद्देश्य
“आदलि कुशलि” का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य कुमाऊँनी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाना भी है।
इसके लिए:
- लेखक
- पाठक
- साहित्यकार
- समाजसेवी
- सामाजिक चिंतक
सभी मिलकर एक सशक्त सांस्कृतिक आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं।
🌟 निष्कर्ष
आज जब आधुनिकता की चकाचौंध में हमारी पारंपरिक संस्कृति कहीं धूमिल होती दिखाई दे रही है,
ऐसे समय में “आदलि कुशलि” एक सशक्त प्रयास है जो हमारी भाषा, संस्कृति और पहचान को जीवित रखने का कार्य कर रही है।






